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(3 जुलाई पुण्यतिथि पर विशेष)
खास अंदाज में डायलॉग बोलने के लिए मशहूर थे राज कुमार

 

नई दिल्ली, 2 जुलाई (आईएएनएस)'जानी...' डायलॉग सुनते ही बालीवुड के अभिनेता राज कुमार का चेहरा आंखों के सामने घूम जाता है। सन 1950 से फिल्मी सफर शुरू करने वाले राज कुमार 3 जुलाई 1996 को 69 साल की उम्र में इस दुनिया से रुखस्त हो गए थे। गुरुवार को उनकी 12वीं पुण्यतिथि मनाई जाएगी।

 

राज कुमार का जन्म 8 अक्टूबर 1926 को हुआ था। उनका असली नाम कुलभूषण पंडित था। सन 1940 में उन्होंने मुंबई पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर के पद पर काम करते हुए अपने करियर की शुरुआत की थी। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने कभी भी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सलामी नहीं दी। बालीवुड में उन्होंने 1952 में फिल्म 'रंगीली' से कदम रखा, लेकिन उन्हें पहचान मिली 1957 की ऑस्कर विजयी फिल्म 'मदर इंडिया' से। इसमें वे नरगिस के पति की भूमिका में थे।

 

'पैगाम' (1959), 'दिल अपना और प्रीत पराई' (1960), 'घराना' (1961), 'दिल एक मंदिर' (1963), 'वक्त' (1965), 'नीलकमल' (1968), 'पाकीजा' (1972), 'लाल पत्थर' (1971) और 'हिंदुस्तान की कसम' (1973) सहित 'मरते दम तक', 'जंग बाज', 'तिरंगा' और 'क्रांतिवीर' फिल्मों में भी उनके अभिनय को खूब सराहा गया।

 

सन 1960 के दौरान 'दिल एक मंदिर' और 'वक्त' के लिए उन्हें फिल्मफेयर ने 'सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता' का पुरस्कार दिया। 70 और 80 के दशक में उन्हें कम ही फिल्मों में मुख्य सहायक अभिनेता के किरदार में देखा गया।

 

लंबे समय बाद दिलीप कुमार के साथ ठाकुर राजेश्वर सिंह की भूमिका में 1991 में सुभाष घई ने अपनी फिल्म 'सौदागर' में उन्हें लिया। तीन दशकों बाद दोनों कलाकारों को साथ देखने की दर्शकों की लालसा ने फिल्म को हिट बना दिया। इससे पहले दोनों 1959 में 'पैगाम' में भाइयों के किरदार में वे साथ देखे गए थे।

 

'जानी...' और फिल्म 'पाकीजा' के 'आपके पांव देखे...' डायलॉग ने उन्होंने इंडस्ट्री में अलग व खास पहचान दिलाई। लंबे समय तक धूम्रपान करते रहने के कारण उन्हें गले का कैंसर हो गया था, जिससे उनकी मौत हो गई।

 

'गॉड एंड गन' (1995) उनकी अंतिम फिल्म थी। बेटे पुरु राजकुमार की पहली फिल्म 'बाल ब्रह्मचारी' के रिलीज से कुछ महीने पहले ही उनकी मृत्यु हो जाने से पुरु की फिल्म उस साल अंत तक रिलीज हो पाई।

 

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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