Home | News | समाचार | HindiNest | Kabir | BoloKids | Bolography | Search | Contact | Share This Page! | Shop Online | Advertise on Boloji


 

सेटेलाइट चैनल उड़ा रहे हैं
सेंसर बोर्ड का मजाक

 

वाराणसी, 16 मई (आईएएनएस)। समाज में स्वस्थ मनोरंजन और साफ सुथरी फिल्म ही दिखाई जाए, इसके लिए सेंसर बोर्ड का प्रावधान किया गया था। लेकिन सेटेलाइट चैनलों की भरमार और चैनलों की गलाकाट प्रतियोगिता के चलते सेंसर बोर्ड के तमाम नियमों और कानूनों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ रही हैं। हद तो तब हो रही है जब सेंसर बोर्ड द्वारा वयस्कों के लिए घोषित फिल्में टीवी के माध्यम से न सिर्फ सभी घरो में दिखाई जा रही हैं, जिन्हें बच्चे भी बड़े मजे से देख रहे हैं।

 

सेंसर बोर्ड की इस बेबसी पर उत्तर प्रदेश के सिनेमा इक्जिबिटर फैडरेशन ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा है कि सेंसर बोर्ड को इस बात पर जरूर ध्यान देना चाहिए कि जो फिल्में सेंसर हैं वे फिल्में टीवी पर कदापि न दिखाई जाए।  सिनेमा इक्जिबिटर फैडरेशन के महामंत्री आलोक दुबे ने कहा कि टीवी पूरे परिवार के मनोरंजन का साधन है जिसे वयस्क और बच्चे एक साथ बैठकर देखते हैं। ऐसे में टीवी पर दिखाई जाने वाली एडल्ट फिल्में बच्चों की मानसिकता पर गलत असर डालती हैं। इसलिए सेंसर बोर्ड को इस पर खास ध्यान देना चाहिए।

 

गौरतलब है कि फिल्म सेंसर बोर्ड की तीन केटेगरी होती हैं पहली यू श्रेणी की होती है जिसे यूनिवर्सल कहा जाता है इसमें कोई प्रतिबंध नहीं होता है। दूसरी यू्रए श्रेणी में आती हैं जिसमें बच्चे अपने माता पिता के साथ फिल्म देख सकते हैं और तीसरी श्रेणी ए की होती है जो केवल व्यस्कों के लिए होती हैं। इन तीनों का आधार होता है फिल्म का विषय क्या है, उसमें एक्शन और हिंसा कितनी है तथा उसमें सेक्स किस हद तक है।

 

गौर करने की बात यह है कि एक प्राइवेट सिनेमा हाल में फिल्म दिखाने के लिए तमाम नियम कानून और कायदे हैं लेकिन सेटेलाइट चैनलों के माध्यम से घर-घर में वे फिल्में भी दिखाई जा रही हैं जो सेंसर के मानक पर सिर्फ वयस्कों के लिए ही बनाई गई हैं। उदाहरण के तौर पर मर्डर, राज, आशिक बनाया आपने जैसी फिल्में एक नहीं कई कई बार टीवी पर दिखाई जा चुकीं हैं। जाहिर है घरों में टीवी सेट पर आने वाली फिल्म को सिर्फ वयस्क ही नही पूरा परिवार एक साथ बैठकर देखता है।

 

सिनेमा इक्जिबिटर फैडरेशन और वाराणसी में एक सिनेमा हाल के मालिक ललित अग्रवाल ने कहते हैं कि सेंसर बोर्ड के नियमों की धज्जियाँ सिर्फ सेटेलाइट चैनल ही नहीं बल्कि कई सिनेमा हाल भी उड़ा रहे हैं। हालत यह है की वाराणसी के अधिकांश सिनेमाघरों में आजकल अश्लील फिल्में ही दिखाई जा रही हैं जिसके लिए न सिर्फ अखबारों में बाकायदा विज्ञापन निकाले जा रहें हैं, बल्कि गली चौराहों पर खुलेआम अश्लील पोस्टर भी लगाए जा रहे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि न तो मनोरंजन विभाग इस पर ध्यान दे रहा है और न ही जिला प्रशासन।

 

ललित अग्रवाल ने यहां तक कहा कि कुछ सिनेमाहाल अश्लील फिल्मों के लिए ही जाने जाते हैं जैसे- गंगा, शिल्पी, लक्ष्मी और कुसुम सिनेमा हालों में सिर्फ अश्लील फिल्में ही लगाई जाती हैं। क्या मनोरंजन विभाग को यह दिखाई नहीं देता है। कुल मिलकर हकीकत यह है की सेंसर बोर्ड की ढिलाई से सेटेलाइट चैनल मनमानी कर रहे हैं और प्रशासन की लापरवाही से सिनेमाहाल। लेकिन इन दोनों की लापरवाही में घाटा सिर्फ समाज का हो रहा है जिसे सुधारने का दावा तो सभी करते हैं लेकिन जिम्मेदारी कोई नहीं निभाता।

 

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

Advertise Your Site            

 

Recommend This Page!

Home | News | HindiNest | समाचार | Kabir | BoloKids | Bolography | Search | Contact | Shop Online | Advertise on Boloji

(C) Boloji.com 1999-2008 - All Rights Reserved
Boloji.com is owned and managed by Boloji Media Inc
Privacy Policy | Disclaimer
No part of this Internet site may be reproduced without prior written permission of the copyright holder.