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तेल की आपूर्ति में बढ़ोतरी के
लिए ओपेक पर दबाव बढ़ा

 

नई दिल्ली, 10 मई (आईएएनएस)। कच्चे तेल की कीमतों में रिकार्ड बढ़ोतरी के मद्देनजर तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक पर तेल आपूर्ति में वृध्दि करने का दबाव बढ़ गया है।  कुछेक ओपेक राष्ट्र आपूर्ति में बढ़ोतरी के लिए दबी जुबान से हामी भी भर रहे हैं, लेकिन ईरान व वेनेजुएला जैसे देश राजनीतिक व कूटनीतिक बाध्यताओं के चलते बढ़ोतरी के सख्त खिलाफ हैं।

 

णउधर, डालर में कमजोरी, आपूर्ति संकट व हीटिंग आयल व डीजल के स्टाक में कमी के मद्देनजर अंतराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल जारी है।

 

न्यूयार्क मकर्ेंटाइल एक्सचेंज (नाइमेक्स) में सप्ताहांत कारोबार के दौरान तेल का जून वायदा 125.98 डालर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर तक चला गया। लंदन के आईसीई वायदा में भी सप्ताहांत ब्रेंट क्रूड का जून वायदा 124.91 डालर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर पर दर्ज किया गया।

 

राजनीति व अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति से इतर स्वतंत्र बाजार समीक्षकों की राय है कि वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति की दरों में वृध्दि गंभीर चिंता का विषय है और ओपेक राष्ट्रों को इस मामले में सकारात्मक कदम उठाना चाहिए। समीक्षकों के अनुसार वर्ष 1973 के बाद से मुद्रास्फीति को लेकर यह सबसे बड़ा संकट है। उच्च महंगाई दर की वजह से अमेरिका में बेरोजगारी दर बढ़कर 8 फीसदी तक पहुंच गई है।

 

विकसित राष्ट्रों सें इतर विकासशील राष्ट्रों की स्थिति भी इस मामले में बेहतर नहीं है। कच्चे तेल की कीमतों में वृध्दि से विश्व के दो बड़े विकासशील राष्ट्र चीन और भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। सरकार के तमाम उपायों के बावजूद तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत में महंगाई दर में तेजी रूकने का नाम नहीं ले रही है।

 

केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन (सीएसओ) से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार 26 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान देश में महंगाई दर बढ़कर 42 महीनों के उच्चतम स्तर यानी 7.61 फीसदी के स्तर पर बरकरार रही। गत 19 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान देश में महंगाई दर 7.57 फीसदी थी।

 

इस बीच आपेक से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि सितंबर में प्रस्तावित बैठक से पहले ओपेक राष्ट्र आपूर्ति में बढ़ोतरी के मामले पर विचार कर सकते हैं। ओपेक की तरफ से हालिया दिनों में आपूर्ति को लेकर पहली बार इस तरह का सकारात्मक बयान आया है।

 

ओपेक सूत्रों के मुताबिक 5 लाख बैरल की दैनिक बढ़ोतरी से कीमतों पर अंकुश लग सकता है। लेकिन ठीक इसके विपरीत ओपेक राष्ट्रों के मंत्री व अधिकारी सार्वजनिक तौर पर इस बात से कतई सहमत नहीं हैं कि कीमतों में वृध्दि के लिए आपूर्ति संकट जिम्मेदार है।

 

ये राष्ट्र अभी भी डालर में कमजोरी और अमेरिकी आर्थिक नीतियों को तेल की कीमतों में तेजी के लिए जिम्मेदार मान रहे हैं।

 

इसी संबंध में ओपेक के महासचिव अब्दुल्ला अल बद्र ने गुरुवार को कहा था कि अगर जरूरत हुई तो ओपेक राष्ट्र मांग के मद्देनजर आपूर्ति को बढ़ाने पर  जरूर विचार करेंगे, बावजूद तेल की वैश्विक आपूर्ति को उन्होंने पर्याप्त बताया।

 

ओपेक राष्ट्रों की अगली बैठक आस्ट्रिया की राजधानी वियना में 9 सितंबर को प्रस्तावित है।

 

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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