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परमाणु समझौते से पीछे न हटे भारत : कलाम

 

नई दिल्ली, 9 मई (आईएएनएस)। मई 1998 में हुए परमाणु परीक्षणों के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा है कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौता किसी भी तरह देश की संप्रभुता के लिए खतरा नहीं है और निसंकोच इसे आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

 

एक विशेष भेंटवार्ता में कलाम ने आईएएनएस से कहा, ''अगर भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा पैदा होता भी है तो हम यह समझौता रद्द कर सकते हैं।''

 

यह पहला मौका है जब देश के प्रक्षेपास्त्र कार्यक्रमों के जनक माने जाने वाले कलाम ने इस समझौते के पक्ष में कोई बयान दिया है।

 

मई 1998 में राजस्थान के पोखरण में हुए परमाणु परीक्षणों के समय राष्ट्रीय रक्षा एवं अनुसंधान संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष रहे कलाम का मानना है कि भारत द्वारा किए गए वे पांचों परमाणु परीक्षण जायज थे।

 

कलाम ने कहा, ''भारत का परमाणु परीक्षण करने का निर्णय एकदम सही था। इससे हमारे ऊपर कुछ तकनीकी और आर्थिक प्रतिबंध तो लगे लेकिन देश के लोगों में आत्मविश्वास का संचार भी हुआ कि हम ऐसा कर सकते हैं।''

 

अपने जीवन के यादगार लम्हों को याद करते हुए कलाम ने बताया कि सन 1980 में रोहिणी उपग्रह को अंतरिक्ष में ले जाने वाले एसएलवी 3 राकेट का परीक्षण उनके जीवन की यादगार घटनाओं में से पहली थी। इसके बाद 1989 में अग्नि प्रक्षेपास्त्र का परीक्षण, सरकार द्वारा विजन 2020 को स्वीकार्यता और फिर 1998 में देश का परमाणु क्षमता संपन्न देश बनना आता है।

 

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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