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रबर को कितना लचीला बनाएगा
वायदा कारोबार पर रोक!

 

नई दिल्ली, 9 मई (आईएएनएस)। वायदा बाजार नियामक संस्था फारवर्ड मार्केट कमीशन (एफएमसी) द्वारा रबर के वायदा कारोबार पर रोक की घोषणा से इसकी कीमतों पर पड़ने वाने संभावित असर को लेकर व्यापारिक हलकों में मतभेद है।

 

ज्यादातर कारोबारी व समीक्षक जहां इस बात के पक्षधर हैं कि सरकार का यह फैसला कीमतों को नियंत्रित करने में कारगर सिध्द नहीं होगा, वहीं कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार के इस उपाय को तर्कसंगत करार देने वालों की भी कमी नहीं है। 

 

आल इंडिया रबर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष एम.एफ. वोहरा के अनुसार एक ऐसे देश में जहां पहले से ही रबर की कम आपूर्ति है, सट्टेबाजी को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। वोहरा के मुताबिक प्रतिबंध तब तक लगा रहना चाहिए जब तक देश रबर के मामले में आत्मनिर्भर न हो जाए।

 

रबर बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2007-08 के दौरान देश में रबर का कुल उत्पादन घटकर 7 लाख 78 हजार 60 टन रह गया। वर्ष 2006-07 के दौरान देश में कुल 8 लाख 10 हजार 290 टन रबर का उत्पादन किया गया था।

 

समीक्षकों के अनुसार आलोच्य वर्ष के दौरान उत्पादन में कमी की वजह प्रतिकूल मौसम रहा। वहीं, आलोच्य अवधि के दौरान कुल 87 हजार टन रबर का आयात किया गया। वर्ष 2006-07 के दौरान कुल 89 हजार 699 टन रबर का आयात किया गया था।

 

ज्यादातर समीक्षकों के मुताबिक वायदा कारोबार की जगह कच्चे तेल की कीमतों में वृध्दि के मद्देनजर अंतराष्ट्रीय बाजार में रबर की कीमतों में तेजी घरेलू कीमतों में बढ़त के लिए जिम्मेदार है। घरेलू बाजार में फिलहाल रबर की कीमत 12.5 लाख रुपये प्रति टन है जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि के दौरान इसकी कीमत 8 लाख रुपये प्रति टन थी।

 

कोच्चि में बुधवार को क्रूड की कीमतों में उछाल की वजह से हाजिर रबर की कीमत अपने उच्चतम स्तर यानी 120 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 123 डालर से ऊपर चल रही है।

 

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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